बिहार में जिलाधिकारियों की रैंकिंग जारी: अररिया सबसे फिसड्डी, बांका शीर्ष पर

बिहार में जिलाधिकारियों की रैंकिंग जारी: अररिया सबसे फिसड्डी, बांका शीर्ष पर

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बिहार में जिलाधिकारियों की रैंकिंग जारी: अररिया सबसे फिसड्डी, बांका शीर्ष पर
बिहार में पहली बार जिलाधिकारियों (DM) की रैंकिंग जारी की गई है। यह रैंकिंग राज्य के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा संचालित योजनाओं और कार्यों की समीक्षा के बाद बनाई गई है। इस रैंकिंग में डीएम के प्रदर्शन को विभिन्न मानदंडों पर परखा गया, जिसमें भूमि से जुड़े कार्यों के निपटान से लेकर आधार सीडिंग जैसी योजनाओं के क्रियान्वयन तक का मूल्यांकन किया गया है।

अररिया सबसे फिसड्डी

इस रैंकिंग में अररिया जिले के डीएम अनिल कुमार सबसे फिसड्डी साबित हुए हैं। उन्हें 100 में से सिर्फ 20.9 अंक प्राप्त हुए हैं, जिससे अररिया जिला अंतिम स्थान पर है। पटना जिले का भी प्रदर्शन खराब रहा और यह जिला नीचे से पांचवें स्थान पर, यानी 34वें पायदान पर है। पटना को 26.92 अंक प्राप्त हुए हैं।

रैंकिंग के आधार

जिलाधिकारियों के प्रदर्शन को आठ प्रमुख मानदंडों पर आंका गया है, जिनमें शामिल हैं:

दाखिल-खारिज मामलों का निपटारा

परिमार्जन प्लस योजना

अभियान बसेरा-2

आधार सीडिंग

एडीएम कोर्ट की निगरानी


बांका को मिला पहला स्थान

रैंकिंग में बांका जिला सबसे ऊपर है, जहाँ के डीएम अंशुल कुमार को 100 में से 56.80 अंक मिले हैं। शेखपुरा और सिवान को क्रमशः दूसरा और तीसरा स्थान मिला है। शेखपुरा के डीएम आरिफ अहसान को 51.33 अंक मिले, जबकि सिवान के डीएम मुकुल कुमार गुप्ता को 42.68 अंक प्राप्त हुए।

शीर्ष 10 जिलों की सूची

1. बांका (56.80 अंक)


2. शेखपुरा (51.33 अंक)


3. सिवान (42.68 अंक)


4. औरंगाबाद


5. नालंदा


6. कैमूर


7. जहानाबाद


8. बेगूसराय


9. भोजपुर


10. पूर्णिया



फिसड्डी जिलों की सूची

अंतिम स्थान पर अररिया है, जबकि अन्य फिसड्डी जिलों में शामिल हैं:

पटना (34वां स्थान, 26.92 अंक)

नवादा (26.61 अंक)

पश्चिमी चंपारण (26.03 अंक)

सहरसा (25.11 अंक)

अररिया (20.09 अंक)


रैंकिंग का प्रभाव

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह ने बताया कि यह प्रक्रिया सितंबर से शुरू हुई है और अब प्रत्येक महीने जिलाधिकारियों के कामकाज की समीक्षा की जाएगी। इसके आधार पर उनकी रैंकिंग तय की जाएगी और वार्षिक कार्य मूल्यांकन प्रतिवेदन में भी इन अंकों को जोड़ा जाएगा।

इस रैंकिंग का उद्देश्य है कि जिलाधिकारी अपने-अपने जिलों में योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें और जमीन से जुड़े मामलों का शीघ्र निपटान करें। यह न केवल उनके व्यक्तिगत प्रदर्शन पर असर डालेगा बल्कि जिले के विकास में भी तेजी लाएगा।

अधिक जानकारियों के लिए हमारे साथ जुड़े रहें।


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Sources: राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार

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