नगर परिषद क्षेत्र में संचालित मांस-मछली की दुकानों पर जल्द ही कार्रवाई हो सकती है। नगर विकास एवं आवास विभाग के निर्देश के बाद नगर परिषद प्रशासन हरकत में आ गया है। विभागीय आदेश के आलोक में बिना लाइसेंस चल रही दुकानों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। 21 फरवरी को नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार ने राज्य के सभी नगर परिषद और नगर पंचायतों को पत्र जारी कर अवैध रूप से संचालित मांस-मछली दुकानों को बंद कराने का निर्देश दिया है।
पत्र में कहा गया है कि कई दुकानें बिहार नगरपालिका अधिनियम 2007 की धारा 345 का उल्लंघन कर संचालित हो रही हैं। कुछ दुकानें बिना अनुज्ञप्ति के चल रही हैं, तो कुछ लाइसेंसधारी दुकानदार भी निर्धारित शर्तों का पालन नहीं कर रहे हैं।
विभागीय पत्र के अनुसार खुले में मांस की बिक्री, अस्वास्थ्यकर वातावरण और मृत पशुओं को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने जैसी शिकायतें सामने आई हैं। इसके अलावा कई दुकानों का धार्मिक स्थलों, शैक्षणिक संस्थानों और भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों के आसपास संचालित होना भी चिंता का विषय बताया गया है।
आदेश के अनुपालन को लेकर नगर परिषद ने शहर में सर्वे शुरू करा दिया है। सर्वे के तहत यह पता लगाया जा रहा है कि कितनी मांस-मछली दुकानें संचालित हैं, कितनों के पास वैध लाइसेंस है और कितनी दुकानें निर्धारित मानकों के अनुरूप चल रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों के किनारे मांस-मछली की दुकानें खुल रही हैं। खुले में मांस बेचने से बदबू और संक्रमण का खतरा बढ़ता है। कचरा फेंके जाने से आवारा कुत्तों की संख्या भी बढ़ गई है।
